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पोंग झील वन्यजीव अभयारण्य

श्रेणी अन्य, एडवेंचर, प्राकृतिक / मनोहर सौंदर्य

पोंग झील वन्यजीव अभयारण्य (जिसे पोंग झील वन्यजीव अभयारण्य या महाराणा प्रताप सागर के नाम से भी जाना जाता है) हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित एक प्रमुख मानव-निर्मित आर्द्रभूमि और संरक्षित क्षेत्र है। यह ब्यास नदी पर बने पोंग बाँध द्वारा निर्मित जलाशय को घेरता है।

इतिहास और स्थिति

पोंग बाँध एक मिट्टी का बाँध है, जिसका निर्माण मुख्य रूप से सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण के लिए 1974–75 में पूरा किया गया था। इस जलाशय को 1983 में वन्यजीव अभयारण्य के रूप में अधिसूचित किया गया (अंतिम अधिसूचना 1999 में हुई) और 1994 में राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि घोषित किया गया। वर्ष 2002 में इसे अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि के रूप में रामसर स्थल का दर्जा प्राप्त हुआ—हिमाचल प्रदेश का पहला रामसर स्थल। यह अभयारण्य झील और आसपास के क्षेत्रों की रक्षा करता है, जो मध्य एशियाई फ्लाईवे के साथ प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण शीतकालीन और विश्राम स्थल के रूप में कार्य करता है।

अभयारण्य का क्षेत्रफल लगभग 207–673 वर्ग किलोमीटर है (स्रोतों के अनुसार आंकड़े अलग-अलग हैं, जल निकाय स्वयं मौसमी रूप से उतार-चढ़ाव करता है—गर्मियों में लगभग 125 वर्ग किमी से मानसून में लगभग 220 वर्ग किमी तक)। झील लगभग 42 किमी लंबी और अधिकतम 19 किमी चौड़ी है, जिसमें धौलाधार पर्वत श्रृंखला बर्फीला दृश्य पृष्ठभूमि प्रदान करती है।

जैव विविधता

पोंग अपनी समृद्ध पक्षी विविधता के लिए प्रसिद्ध है:

  • यहां 420 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ (जिनमें लगभग 54 जलपक्षी) दर्ज की गई हैं।
  • यह बार-हेडेड गीज़ (दुनिया में सबसे बड़ी सभाओं में से एक) की बड़ी संख्या में मेजबानी करता है, साथ ही रूडी शेलडक, नॉर्दर्न पिंटेल, कॉमन कूट, पोचार्ड्स, गल, कॉर्मोरेंट्स, मैलार्ड्स, एग्रेट्स, प्लोवर्स और दुर्लभ प्रजातियाँ जैसे रेड-नेक्ड ग्रीब, इंडियन स्किमर तथा व्हाइट-रंप्ड वल्चर भी।
  • शीतकाल (विशेष रूप से नवंबर से फरवरी/मार्च) में यूरोप, मध्य एशिया और अन्य जगहों से दसियों हजार प्रवासी पक्षी आते हैं—पीक वर्षों में गिनती 1 लाख से अधिक हो चुकी है (जैसे 2025 में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई)।

अन्य वन्यजीवों में शामिल हैं:

  • स्तनधारी (24 प्रजातियाँ): भौंकने वाला हिरण, सांभर, जंगली सूअर, तेंदुआ, नीलगाय, गीदड़, नेवला, ओरिएंटल स्मॉल-क्लॉड ओटर।
  • मछलियाँ (27 प्रजातियाँ): महाशीर, कतला, मिरर कार्प, सिंघाड़ा आदि—जो स्थानीय मत्स्य पालन को सहारा देती हैं।
  • उभयचर, सरीसृप (25 से अधिक प्रजातियाँ) तथा वनस्पति—जिसमें जलमग्न वनस्पतियाँ, घास के मैदान, झाड़ियाँ और पेड़ जैसे बबूल, शीशम, आम और जामुन शामिल हैं।

आकर्षण और गतिविधियाँ

  • पक्षी दर्शन — मुख्य आकर्षण, विशेष रूप से नगरोटा सुरियाँ और कीचड़ के मैदान/गीले घास के मैदानों के आसपास।
  • नौका विहार और जल खेल — खटियार जैसे स्थानों पर उपलब्ध (रोइंग, कैनोइंग, वॉटर स्कीइंग आदि)।
  • मनोरम दृश्य और फोटोग्राफी — झील, पहाड़ों और सूर्यास्त के।
  • आध्यात्मिक स्थल — डूबा हुआ बाथू की लड़ी (शिव और पार्वती को समर्पित बाथू मंदिर), जब जल स्तर कम होता है तो दिखाई देता है।
  • अन्य विकल्प: झील के किनारे साइकिलिंग, मछली पकड़ना और छोटी ट्रेकिंग। यह क्षेत्र इको-टूरिज्म और एडवेंचर का मिश्रण प्रदान करता है।

घूमने का सबसे अच्छा समय

  • नवंबर से फरवरी/मार्च — प्रवासी पक्षियों और सुखद शीतकालीन मौसम के लिए आदर्श।
  • ग्रीष्मकाल (जल खेल और स्पष्ट पहाड़ी दृश्यों के लिए) या मानसून के बाद भी अच्छा हो सकता है, लेकिन पक्षियों की संख्या कम होती है।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग से — अच्छी तरह जुड़ा हुआ; धर्मशाला से लगभग 65 किमी, पठानकोट से लगभग 85 किमी, चंडीगढ़ से लगभग 230 किमी। मुख्य प्रवेश बिंदु नगरोटा सुरियाँ (अभयारण्य के निकट) और धमेटा या खटियार जैसे क्षेत्र हैं।
  • हवाई मार्ग से — निकटतम हवाई अड्डा: गग्गल (कांगड़ा) लगभग 76 किमी दूर।
  • रेल मार्ग से — निकटतम प्रमुख स्टेशन: पठानकोट।
  • वाहनों और पर्यटकों के लिए प्रवेश शुल्क लागू है।

फोटो गैलरी

  • Pong Dam Lake Wildlife Sanctuary
  • Pong Dam Lake Wildlife Sanctuary
  • Bathu ki Laddi (Pong Dam Lake Wildlife Sanctuary)