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सौरभ वन विहार

श्रेणी अन्य, ऐतिहासिक, प्राकृतिक / मनोहर सौंदर्य

सौरभ वन विहार पालमपुर, हिमाचल प्रदेश में स्थित एक खूबसूरत प्रकृति पार्क और पिकनिक स्थल है। यह शांतिपूर्ण स्मारक कैप्टन सौरभ कालिया को समर्पित है, जो पालमपुर के रहने वाले भारतीय सेना अधिकारी थे और 1999 के कारगिल युद्ध में शहीद हुए। यह पार्क हिमाचल प्रदेश वन विभाग द्वारा संचालित है और धौलाधार पर्वतों की तलहटी में बर्फीली नीलग खड (नीलग नदी) के किनारे बसा हुआ है।

कैप्टन सौरभ कालिया कौन थे?

  • जन्म: 29 जून 1976, पालमपुर (हिमाचल प्रदेश)।
  • उन्होंने पालमपुर के डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल में पढ़ाई की और 1997 में हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय से बी.एससी. (मेडिकल) की डिग्री प्राप्त की।
  • उन्होंने संयुक्त रक्षा सेवा (CDS) परीक्षा के माध्यम से भारतीय सेना में भर्ती हुई और 4 जाट रेजिमेंट में कमीशन प्राप्त किया।
  • 15 मई 1999 को कारगिल क्षेत्र के बाजरंग पोस्ट पर गश्त की अगुवाई करते हुए कैप्टन कालिया और उनके पांच जवान पाकिस्तानी सेना के हाथों बंदी बन गए।
  • उन्हें लगभग 22 दिनों (लगभग 7 जून 1999 तक) तक कैद में रखा गया और क्रूर यातनाएं दी गईं। बाद में उनके क्षत-विक्षत शव भारत को सौंपे गए।
  • कैप्टन कालिया मात्र 22 वर्ष की उम्र में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दे बैठे। वे कारगिल संघर्ष में अपनी जान गंवाने वाले प्रारंभिक अधिकारियों में से एक थे।

स्मारक पार्क

कैप्टन सौरभ कालिया की वीरता के सम्मान में हिमाचल प्रदेश वन विभाग ने नीलग खड के किनारे सौरभ वन विहार विकसित किया, जो पालमपुर शहर से लगभग 4 किमी दूर है।

  • यह पार्क लगभग 35 एकड़ के वन क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें देवदार के पेड़, पैदल चलने के रास्ते और नीलग नदी से पानी मोड़कर बनाई गई कृत्रिम झील शामिल है।
  • यह दोहरे उद्देश्य से कार्य करता है — कैप्टन कालिया के साहस की याद दिलाने वाला स्मारक और पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देने वाला प्रकृति संरक्षण एवं इको-टूरिज्म स्थल।
  • पार्क में कैप्टन सौरभ कालिया की प्रतिमा भी स्थापित की गई है तथा उनके गृहनगर क्षेत्र को अब सौरभ नगर के नाम से जाना जाता है।

पार्क की स्थापना 2000 के शुरुआती वर्षों में हुई (कुछ स्रोत 2005 के आसपास इको-टूरिज्म फोकस का उल्लेख करते हैं)। निर्माण के दौरान नदी के पास होने के कारण स्थानीय विरोध और बाद के वर्षों में बाढ़ से काफी नुकसान (खासकर 2018-2020) हुआ, जिसके बाद इसे बहाल कर दोबारा पर्यटकों के लिए खोला गया।

आज सौरभ वन विहार एक शांत जगह है जहां लोग कैप्टन कालिया के साहस को याद करते हुए प्रकृति का आनंद लेते हैं — झील में बोटिंग, पेड़ों के बीच टहलना और धौलाधार की बर्फीली चोटियों को निहारना। यह पर्यटकों को राष्ट्र के लिए बलिदान और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को याद दिलाता है।

मुख्य जानकारी

  • स्थान: पालमपुर शहर से लगभग 4 किमी दूर (बुंदला कंडी रोड / क्वाट गांव के पास)। कार, टैक्सी या लोकल बस से आसानी से पहुंचा जा सकता है।
  • क्षेत्र: लगभग 35 एकड़ वन भूमि, देवदार के पेड़, पैदल पथ और कृत्रिम झील।
  • समय: सुबह 9:30 बजे से शाम 6:30 बजे तक (सभी दिनों खुला; पहाड़ी क्षेत्र में शाम जल्दी अंधेरा हो जाता है, इसलिए शाम से पहले जाना बेहतर)।
  • प्रवेश शुल्क: वयस्क के लिए ₹20 (कुछ रिपोर्ट्स में बच्चों के लिए ₹10)। गेट पर नकद ही स्वीकार किया जाता है।

वहां क्या करें

  • झील पर आरामदायक बोट राइड का आनंद लें (पेडल बोट उपलब्ध)।
  • घने जंगल में प्रकृति की सैर और ट्रेल्स पर टहलें (लगभग 1.9 मील का आसान लूप ट्रेल)।
  • परिवार/दोस्तों के साथ पिकनिक मनाएं (स्थानीय लोगों के लिए बहुत लोकप्रिय)।
  • खूबसूरत पुलों पर और धौलाधार की बर्फीली चोटियों के साथ फोटो खिंचवाएं।

फोटो गैलरी

  • Saurabh Van Vihar
  • Saurabh Van Vihar
  • Saurabh Van Vihar