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हिमाचल प्रदेश राज्य युद्ध स्मारक

श्रेणी अन्य, ऐतिहासिक, प्राकृतिक / मनोहर सौंदर्य

हिमाचल प्रदेश राज्य युद्ध स्मारक (एच.पी. राज्य युद्ध स्मारक या युद्ध स्मारक के नाम से भी जाना जाता है) धर्मशाला, कांगड़ा जिले, हिमाचल प्रदेश में स्थित है। यह हिमाचल प्रदेश के उन वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि है जिन्होंने 1947-48 कश्मीर अभियान, 1962 भारत-चीन युद्ध, 1965 और 1971 भारत-पाक युद्ध, 1999 कारगिल युद्ध तथा संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में अपना जीवन बलिदान कर दिया।

इतिहास और महत्व

इस स्मारक का विचार हिमाचल के युद्ध नायकों को अमर बनाने के लिए उनके नामों को शिलालेखित करने से उभरा। नींव का पत्थर 24 फरवरी 1972 को डॉ. वाई.एस. परमार (हिमाचल प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री) द्वारा रखा गया था। इसका उद्घाटन (जनता को समर्पित) 28 सितंबर 1977 को शांता कुमार, तब के मुख्यमंत्री द्वारा किया गया। एक एनजीओ—जिसे मुख्य रूप से पूर्व सैनिकों द्वारा चलाया जाता है—एचपी राज्य युद्ध स्मारक विकास समिति ने 2001 से इसकी देखभाल और रखरखाव संभाला है।

यह स्मारक विशेषकर युवाओं में देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देता है। इसमें विभिन्न कार्यक्रम, सेमिनार और स्मृति समारोह आयोजित होते हैं (जैसे गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, विजय दिवस और कारगिल विजय दिवस पर)।

स्मारक का वर्णन

केंद्रीय स्मारक में तीन घुमावदार काली संगमरमर की दीवारें (प्रत्येक लगभग 24 फीट ऊंची) हैं, जो भारतीय सशस्त्र बलों के तीनों अंगों—थलसेना, नौसेना और वायुसेना—का प्रतीक हैं। इनकी पाँच सतहों पर शहीदों के नाम अंकित हैं, जबकि छठी सतह पर राष्ट्रीय स्वतंत्रता की ज्वाला को दर्शाती एक भित्ति चित्र (म्यूरल) है। ये दीवारें एक गोलाकार उथले तालाब से उठती हैं, जिसमें केंद्र में एक कटोरा और 21 पानी के फव्वारे हैं।

चारों ओर घूमने वाला रास्ता गुलाबी, लाल और सफेद गुलाबों की क्यारियों से सजा है, जो जीवन के विभिन्न चरणों और अस्तित्व के चक्र का प्रतीक है। घुमावदार डिज़ाइन मानवीय और राष्ट्रीय जीवन की निरंतरता को दर्शाता है।

देवदार के जंगलों, सुंदर बगीचों और घुमावदार पगडंडियों के बीच का शांत वातावरण गहन चिंतन और शांति का अनुभव कराता है।

आस-पास की आकर्षण स्थल और सुविधाएँ

स्मारक के ठीक बगल में राज्य युद्ध संग्रहालय है, जो भारत के सैन्य इतिहास को प्रदर्शनियों, कलाकृतियों, तस्वीरों, वीरता पुरस्कार विजेताओं (परमवीर चक्र प्राप्तकर्ताओं सहित) की मूर्तियों और प्रमुख अभियानों (जैसे बर्मा अभियान) के डिस्प्ले के माध्यम से प्रदर्शित करता है। यह स्मारक के लिए एक शैक्षणिक पूरक है।

अन्य सुविधाओं में बच्चों का पार्क, पर्याप्त पार्किंग और जंगल के बीच चलने के रास्ते शामिल हैं। पास में एक छोटा कैफे और ऐतिहासिक जीपीजी कॉलेज भी है।

आगंतुक जानकारी

  • समय: रोजाना सुबह 8:00 बजे से शाम 8:00 बजे तक खुला (कुछ स्रोतों में सुबह 6:00 बजे से)।
  • प्रवेश शुल्क: प्रति व्यक्ति ₹20 (5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे निःशुल्क)। पार्किंग शुल्क अलग से—दो पहिया वाहन ₹20, चार पहिया वाहन पहले 4 घंटे के लिए ₹30।
  • स्थान: धर्मशाला शहर के प्रवेश द्वार पर, जीपीजी कॉलेज के पास, जवाहर नगर, धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश 176215। यह देवदार के जंगलों में बसा हुआ है और मुख्य आईएसबीटी (बस स्टैंड) से लगभग 2 किमी दूर है।
  • कैसे पहुँचें: धर्मशाला सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। निकटतम हवाई अड्डा: कांगड़ा (गग्गल) एयरपोर्ट (DHM)। निकटतम प्रमुख रेलवे स्टेशन: पठानकोट। धर्मशाला शहर केंद्र से टैक्सी, बस या स्थानीय परिवहन आसानी से उपलब्ध है।
  • घूमने का सबसे अच्छा समय: किसी भी समय, लेकिन सुबह या शाम के समय शांति भरा होता है। यह स्थल परिवार के साथ घूमने योग्य है और सुखद पैदल यात्रा का मौका देता है।

 

फोटो गैलरी

  • युद्ध स्मारक
  • War Museum
  • HP State War Museum