जिला आपातकालीन ऑपरेशन केंद्र

डीओसी डीडीएमए द्वारा उन्हें सौंपी गई भूमिकाओं में प्रदर्शन करने के लिए आयुक्त को सहायता करेगा। डीईओसी निम्नलिखित कार्य करेगा:

  1. जिला कंट्रोल रूम आपदा प्रबंधन के लिए तंत्रिका केंद्र होगा।
  2. आपदा प्रबंधन के लिए कार्यों की निगरानी, ​​समन्वय और कार्यान्वयन करना।
  3. आपदा की स्थिति में ईएसएफ (इमरजेंसी सपोर्ट फ़ंक्शन) को सक्रिय करें और विभिन्न विभागों/एजेंसियों की कार्रवाई समन्वय करें।
  4. सुनिश्चित करें कि सभी चेतावनी, संचार प्रणालियों और उपकरण काम काम करने की स्थिति में हैं।
  5. विभिन्न स्थानों और गांवों (जिलों के कुछ हिस्सों) की भेद्यता पर जिला विभागों से नियमित आधार पर जानकारी प्राप्त करें।
  6. जिला स्तर के विभागों की तैयारी के बारे में रिपोर्ट प्राप्त करें और उनकी आवश्यकताओं को व्यवस्थित करने और उनकी पूर्ति करने के लिए उनके स्रोत उपलब्ध करवायें।
  7. बदलते परिदृश्य के अनुसार आपदा प्रबंधन की कार्यवाही का नवीनीकरण करें।
  8. भारत आपदा संसाधन नेटवर्क (आईडीआरएन) के माध्यम से सभी संसाधनों की वेब-आधारित सूची बनाए रखें।
  9. आपदा/आपातकाल/दुर्घटनाओं के राहत आयुक्त कार्यालय को जिला में नियमित रूप से जगह लेते हुए सूचनाएं उपलब्ध कराएं और उनके द्वारा किए गए आपदाओं और घाटे का डाटा बेस बनाए रखें।
  10. तैयारी के उपायों और प्रशिक्षण गतिविधियों को मॉनिटर करें।
  11. उचित माध्यम के माध्यम से जिला स्तर, स्थानीय स्तर और आपदा प्रवण क्षेत्रों में जानकारी प्रदान करना।
  12. परिस्थितियों के बारे मीडिया को संक्षिप्त करें और आपदाओं के दौरान दिन-प्रतिदिन की रिपोर्ट तैयार करें।
  13. वास्तविक परिदृश्य और जिला प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई की रिपोर्ट तैयार करें।
  14. प्रशिक्षित कर्मियों और स्वयंसेवकों के डेटा बेस को बनाए रखें जिन्हें किसी भी समय संपर्क किया जा सकता है।
  15. साइट पर ऑपरेशन केंद्र, राज्य ईओसी और अन्य आपातकालीन सेवाओं के साथ संपर्क रखें।

अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट आपदा प्रबंधन के लिए नोडल अधिकारी होगा और डीईओसी का प्रभारी होगा। डीईओसी के डिजाइन, लेआउट, उपकरण और संचालन राज्य स्तर पर तैयार ईओसी मैनुअल के अनुसार होगा।