श्री बगलामुखी माता मंदिर
श्री बगलामुखी माता मंदिर
श्री बगलामुखी माता मंदिर (जिसे मां बगलामुखी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है) भारत के हिमाचल प्रदेश राज्य के कांगड़ा जिले के बनखंडी (देहरा के पास) में स्थित एक प्रमुख हिंदू तीर्थस्थल है। यह मंदिर देवी बगलामुखी को समर्पित है, जो तांत्रिक शाक्त धर्म में दस महाविद्याओं (महान ज्ञान की देवियों) में से एक हैं। देवी को पीताम्बरा (पीले वस्त्र धारण करने वाली) के रूप में पूजा जाता है और वह शत्रुओं को पंगु बनाने, विवादों में विजय दिलाने, बुराई से रक्षा करने और इच्छाओं की पूर्ति करने, विशेषकर कानूनी मामलों, प्रतियोगिताओं और बाधाओं को दूर करने के लिए जानी जाती हैं।
यह मंदिर सुरम्य कांगड़ा घाटी में स्थित है।
यह मंदिर एक सिद्ध पीठ (accomplished spiritual site) माना जाता है और भारत के तीन सबसे महत्वपूर्ण बगलामुखी मंदिरों में से एक है (अन्य दो दतिया, मध्य प्रदेश और नलखेड़ा, मध्य प्रदेश में हैं)। यह मंदिर राजनीति, खेल और मनोरंजन जगत की हस्तियों सहित कई भक्तों को आकर्षित करता है।
स्थान और पहुंच
यह मंदिर चंडीगढ़-धर्मशाला राष्ट्रीय राजमार्ग (NH503) पर, कांगड़ा शहर से लगभग 30-40 किमी दूर, धौलाधार हिमालय श्रृंखला के बीच स्थित है। निकटतम हवाई अड्डा गग्गल (कांगड़ा) हवाई अड्डा (~40 किमी) है। निकटतम रेलवे स्टेशन कांगड़ा मंदिर स्टेशन (~40 किमी) है। यह सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है; कांगड़ा, धर्मशाला या पठानकोट से बसें और टैक्सी उपलब्ध हैं।
इतिहास और किंवदंतियाँ
किंवदंतियों के अनुसार
भगवान विष्णु के अनुरोध पर एक ब्रह्मांडीय तूफान को शांत करने के लिए देवी एक हल्दी के सरोवर से प्रकट हुई थीं। कहा जाता है कि पांडवों ने अपने द्वापर युग के वनवास के दौरान इस मंदिर का निर्माण एक ही रात में किया था। भगवान राम ने रावण पर विजय प्राप्त करने के लिए ब्रह्मास्त्र प्राप्त करने हेतु यहां पूजा की थी (हनुमान द्वारा निर्देशित)। यह स्थल प्राचीन है, जिसके संदर्भ तांत्रिक ग्रंथों में मिलते हैं।
महत्व और पूजा
पीला रंग देवी का पसंदीदा रंग है: मंदिर को पीले रंग से रंगा गया है, भक्त पीले कपड़े पहनते हैं, पीले रंग की मिठाइयाँ (जैसे बेसन के लड्डू) चढ़ाते हैं, और सजावट सुनहरे/पीले रंग की होती है।
यह मंदिर शक्तिशाली हवन (अग्नि अनुष्ठान) और यज्ञों के लिए जाना जाता है जिनके बारे में माना जाता है कि वे शीघ्र परिणाम देते हैं – विशेषकर रात्रि कालीन हवन।
भक्त स्तम्भन (शत्रुओं को पंगु बनाने), अदालती मामलों में विजय और सुरक्षा के लिए आशीर्वाद मांगते हैं।
आंतरिक दृश्य जिनमें देवी बगलामुखी की पीले रंग के वस्त्रों में सजी मूर्ति दिखाई गई है।
गर्भगृह में देवी केंद्र में हैं (कभी-कभी लक्ष्मी और सरस्वती उनके साथ होती हैं), साथ ही भगवान शिव, भैरव और हनुमान के मंदिर भी हैं।
मंदिर की विशेषताएं
वास्तुकला: गुंबद के आकार की छत, जटिल नक्काशी, पीले रंग से रंगी संरचना।
सुविधाएं: हवन कुंड, पूजा सामग्री के लिए दुकानें, कैफे और स्वच्छ परिसर।
समय: आम तौर पर सुबह 5:00 बजे से रात 9:30 बजे तक (आरती के समय के लिए स्थानीय स्तर पर पुष्टि करें)।
त्यौहार: नवरात्रि, गुरु पूर्णिमा और बसंत पंचमी के दौरान यहां भीड़ रहती है।