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कांगड़ा वैली रेल

श्रेणी अन्य, एडवेंचर, ऐतिहासिक, प्राकृतिक / मनोहर सौंदर्य

कांगड़ा वैली रेल

यह भारत में एक ऐतिहासिक 164 किमी (102 मील) की नैरो-गेज रेलवे है, जो पंजाब के पठानकोट से हिमाचल प्रदेश के जोगिंदरनगर तक जाती है। इसे colloquially “कांगड़ा टॉय ट्रेन” के नाम से जाना जाता है। यह अपनी सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, क्योंकि यह उप-हिमालयी कांगड़ा घाटी से होकर गुजरती है और बर्फ से ढके धौलाधार पर्वत श्रृंखलाओं के मनोरम दृश्य प्रदान करती है।

मुख्य विशेषताएं और तकनीकी विवरण

  • गेज और इंफ्रास्ट्रक्चर: यह 2 फीट 6 इंच (762 मिमी) नैरो-गेज रेलवे है। पहाड़ी इलाके के बावजूद, इसे तेज ढलानों से बचाने के लिए लंबा, घुमावदार रास्ता बनाया गया है। इसमें केवल दो सुरंगें (76 मीटर और 328 मीटर) हैं, लेकिन लगभग 1,000 पुल और 484 मोड़ हैं।
  • ऊंचाई: लाइन पठानकोट (383 मीटर) से शुरू होकर अहजू स्टेशन (1,290 मीटर) पर सबसे ऊंचे बिंदु तक पहुंचती है, फिर जोगिंदरनगर में उतरती है।
  • हैरिटेज स्थिति: यह रेलवे 1929 में शुरू हुई थी और वर्तमान में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों की अस्थायी सूची में शामिल है।
  • सिग्नलिंग: यह अभी भी पुरानी नील्स बॉल टोकन प्रणाली का उपयोग करती है, जो सिंगल-लाइन ट्रैक पर सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

रूट और यात्रा जानकारी

  • मुख्य स्टेशन: इस लाइन पर कुल 33 स्टॉप हैं, जिनमें प्रमुख स्टेशन हैं – जसूर (नूरपुर रोड), ज्वालामुखी रोड, कांगड़ा, नगरोटा, पालमपुर और बैजनाथ पपरोला।
  • यात्रा समय: पठानकोट से जोगिंदरनगर तक पूरी यात्रा में लगभग 10 घंटे लगते हैं।
  • टिकट और बुकिंग: किराया बहुत कम और सब्सिडाइज्ड है (केवल ₹10–30 तक), ताकि स्थानीय ग्रामीणों को लाभ मिले। नियमित सेवाओं के लिए ऑनलाइन बुकिंग उपलब्ध नहीं है; टिकट स्टेशन से ही खरीदने पड़ते हैं।
  • वर्तमान स्थिति (2026): यह मुख्य रूप से स्थानीय लोगों के लिए है, लेकिन पुरानी इंफ्रास्ट्रक्चर और प्राकृतिक आपदाओं (जैसे पुल क्षति) के कारण समय-समय पर सेवाएं बाधित होती रहती हैं। 2025 के अंत/2026 की शुरुआत में चक्की ब्रिज की मरम्मत और अन्य हिस्सों में काम चल रहा है, जिससे कांगड़ा से जोगिंदरनगर तक कुछ सेक्शन में सेवाएं बहाल हुई हैं, लेकिन पूरी लाइन (खासकर पठानकोट से) अभी भी आंशिक रूप से प्रभावित है। लैंडस्लाइड और मॉनसून के कारण अक्सर रुकावटें आती हैं।

भविष्य की योजनाएं

सरकार द्वारा लाइन को आधुनिक बनाने की लगातार कोशिश चल रही है। 2026 तक, पठानकोट-जोगिंदरनगर के 120 किमी हिस्से को ब्रॉड-गेज में बदलने की संभावना का मूल्यांकन करने के लिए फिजिकल सर्वे पूरा हो चुका है। इससे गति और कनेक्टिविटी बढ़ेगी, लेकिन साथ ही इसकी हैरिटेज साइट के रूप में संरक्षण को लेकर बहस भी जारी है।

 

फोटो गैलरी

  • Kangra-Valley Rail
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